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मग धर्म संसद महाधिवेशन क्यों ?

अग्नि पूजक और सूर्य पूजक ब्राह्मणों के जीन एक ही हैं, और origin भी एक ही है। फिर भी अग्नि पूजक पारसी, अल्पसंख्यक समुदाय होकर भी सबसे आगे हैं। आखिर ऐसा क्यों है ? हमें उनसे सीखने की जरूरत है।

देश के करीब 70- 80% इकोनोमी पर उनका अधिकार है और हम 70- 80 प्रतिशत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं, ऐसा क्यों है ?

कैसे हम अपने वर्तमान स्तर से उच्चतर स्तर को प्राप्त करें, इसका समाज में आज चिंतन जरूरी है।

इसी अवधारणा के साथ, मग धर्म संसद का एक उच्चस्तरीय चिंतन महाअधिवेशन आयोजित किया जा रहा है। यह सुकार्य एक कुशल प्रबंधक के नेतृत्व में होगा।

इस आयोजन में देश भर के विभिन्न क्षेत्रों से विभिन्न विधाओं के योग्य और विशेषज्ञ व्यक्तित्वों के द्वारा समाज के विकास के लिए आर्थिक समृद्धि के लिए सामाजिक राजनीतिक सभी विषयों पर विचार हेतु महाअधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश भर से करीब 300 से ज्यादा विद्वानों के साथ चिंतन मनन किया जायेगा।

यह महाअधिवेशन पूर्व परम्परा के तरह पुड़ी बुंदिया खाये और चल दिये वाली नहीं है।आप समाज के विकास के लिए क्या कर सकते है इसके लिए आप का स्वागत है।

प्रबंधन एक अमूर्त शक्ति है, जो दिखाई नहीं पड़ती लेकिन संगठन के कार्यों के रूप में जिसकी उपस्थिति को अनुभव किया जा सकता है। संगठन में प्रबंधन के प्रभाव का भान, योजनाओं के अनुसार लक्ष्यों की प्राप्ति, प्रसन्न एवं संतुष्ट व्यवस्था के रूप में ही होता है।

महाधिवेशन के मुख्य बिंदु

इस महाअधिवेशन में मुख्य विचारणीय बिंदु इस प्रकार हैं :-

१.  प्रत्येक व्यक्ति का संबंधों की इस श्रृंखला में किसी न किसी कार्य विशेष को पूरा करने के लिए कुछ न कुछ अधिकार दिये जाते हैं अर्थात निर्णय लेने का अधिकार।अधिकार और उत्तरदायित्व के संतुलन से संगठन में विभिन्न स्तरों स्तरों का निर्माण होता है।
२.  सामाजिक दायित्वों को पूरा करने के लिए विकासशील नियमों का पालन करना जरूरी है क्योंकि समाज उच्चतर जीवन चाहता है।
३.  समाज के विकास के लिए आर्थिक समृद्धि जरूरी है इसके लिए कुशल प्रबंधन एवं साहस के साथ आगे बढ़ने से ही संभव होगा।
४.  रचनात्मक संघर्षों को बढ़ावा देना ताकि संगठन के लक्ष्यों को श्रेष्ठ ढंग से प्राप्त किया जा सके।
५.  सामूहिक उद्देश्यों की प्राप्तिके लिए अपना श्रेष्ठतम योगदान देना।
६.  समस्याओं का समाधान करना,निर्णय लेना,योजनाएं बनाना,बजट बनाना,दायित्व निर्धारित करना तथा अधिकारों का प्रत्यारोपण करना।
७.  कुशल मानव संसाधन किसी भी संगठन की सबसे बड़ी सम्पत्ति होती है।
८.  न्यूनतम प्रयत्नों से अधिकतम परिणामों को प्राप्त करना।
९.  दूरदर्शिता,कल्पना शक्ति,संगठन क्षमता तथा आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकी एवं विधियों के सफल प्रयोग करना ।
१०. साहित्य मनीषी आचार्य जानकीवल्ल्भ शास्त्री जी एवं आचार्य रंजन सूरीदेव जी का सम्मान समारोह।तथा 05 मग बंधुओं को साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए चयनित कर सम्मानित करना।
११. देश पर कुर्बान मग समाज के स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान तथा वर्तमान में देश की सीमा पर शहीदों के सम्मान में कारगिल चौक पटना में दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि अर्पित करना ।

इन सभी विषयों तथा अन्यान्य विषयों पर विचार हेतु महाअधिवेशन में आप सभी बंधू, बांधव सादर आमंत्रित हैं।

— मग धर्म संसद

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